RBI 500 Note Update: भारतीय अर्थव्यवस्था में नकली मुद्रा का प्रचलन एक गंभीर समस्या बनी हुई है। वर्तमान में, देश में सबसे बड़ा मूल्यवर्ग का नोट 500 रुपये का है, जिसके बाद से रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के लिए चिंता का विषय बढ़ गया है। 2000 रुपये के नोट की वापसी के बाद, अब 500 रुपये के नोट से जुड़ी चुनौतियां सामने आई हैं, जो विशेष रूप से नकली नोटों के बढ़ते प्रचलन से संबंधित हैं।
2000 रुपये के नोट की वापसी
मई 2023 में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने 2000 रुपये के नोट को चलन से वापस लेने का निर्णय लिया था। बैंक ने इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जनता को चार महीने का समय दिया था। इस कदम के कई कारण थे, जिनमें नकली नोटों का प्रचलन भी एक महत्वपूर्ण कारण था।
नकली 500 रुपये के नोट
आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों ने 500 रुपये के नकली नोटों के बढ़ते प्रचलन पर प्रकाश डाला है। वित्त वर्ष 2023 में, लगभग 91,110 नकली 500 रुपये के नोट पकड़े गए। यदि ये नोट चलन में आ जाते, तो बाजार में 4.5 करोड़ रुपये से अधिक की नकली मुद्रा का प्रसार हो सकता था, जिससे जनता को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता।
बढ़ता प्रचलन
पिछले तीन वित्तीय वर्षों के आंकड़ों की तुलना करें तो नकली नोटों के प्रचलन में वृद्धि की चिंताजनक प्रवृत्ति दिखाई देती है। वित्त वर्ष 2021 में 39,450, वित्त वर्ष 2022 में 76,660, और वित्त वर्ष 2023 में 91,110 नकली 500 रुपये के नोट बरामद किए गए। यह एक वर्ष में 14.6% की वृद्धि दर्शाता है, जो आरबीआई और जनता दोनों के लिए चिंता का विषय है।
2000 रुपये के नकली नोटों में कमी
2000 रुपये के नोट के चलन से बाहर होने के साथ, इस मूल्यवर्ग के नकली नोटों की संख्या में 28% की कमी आई है। वित्त वर्ष 2023 में, केवल 9,806 नकली 2000 रुपये के नोट बरामद किए गए। यह कमी इस निर्णय के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।
छोटे मूल्यवर्ग के नकली नोट
केवल उच्च मूल्यवर्ग के नोट ही नहीं, बल्कि निम्न मूल्यवर्ग के नोट भी नकली मुद्रा के दायरे में आते हैं। 20 रुपये के नकली नोटों की संख्या में 8.4% की वृद्धि हुई है। हालांकि, 10 रुपये और 100 रुपये के नकली नोटों की संख्या में क्रमशः 11.6% और 14.7% की कमी देखी गई है।
कुल नकली नोट और उनका प्रभाव
आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023 में कुल 2,25,769 नकली नोट बरामद किए गए। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 2,30,971 से थोड़ा कम है। इस प्रकार के नकली नोट अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं और जनता को धोखाधड़ी का शिकार बनाते हैं।
मुद्रा छपाई का खर्च
आरबीआई ने बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 में, नोट छापने के लिए 4,682.80 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह पिछले वित्त वर्ष के 4,984.80 करोड़ रुपये से कम है। वर्तमान में, देश की मुद्रा के परिचालन में 500 रुपये के नोट का हिस्सा 37.9%, जबकि 10 रुपये के नोट का हिस्सा 19.2% है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। मुद्रा और उससे संबंधित नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। कृपया नवीनतम जानकारी के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या प्रकाशनों का संदर्भ लें। लेख में दी गई जानकारी फरवरी 2025 की स्थिति के अनुसार है और इसमें परिवर्तन संभव है। किसी भी विसंगति की स्थिति में आरबीआई के आधिकारिक दिशा-निर्देश मान्य होंगे।